peace

आज ना गीतों की झनझनाहट कानों में पड़ी ,

और ना रफ्तारों की सरसराहट सड़को पे दिखी ,

क्यूंकि आज ज़िन्दगी बड़ी इत्मिनान सी कटी।

आज ना रौशनियों की टिमटिमाहट आँखों में पड़ी ,

और ना ही किसी ऑटो वाले की किट-किटाहट सुनने को मिली ,

क्यूंकि आज ज़िन्दगी बड़ी इत्मिनान सी कटी।

आज ना ही मेट्रो की भीड़ एक सैलाब सी लगी,

और ना ही सब्जी वाले की चिल्लाहट कानो में पड़ी ,

क्यूंकि आज ज़िन्दगी बड़ी इत्मिनान सी कटी।

हां आज मेरी तकरार हुई परेशानियों से , पर वो मुझे रोक ना सकी ,

मेरे गमो ने मेरे खुशियों के कद को झुकाने की नापाक कोशिश की, पर असफल रही ,

क्यूंकि आज ज़िन्दगी बड़ी इत्मिनान सी कटी।

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Asish Raz

Asish Raz

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